Sunday, 16 February 2014

..इस बकवास में..!

..निकला हूँ मैं सच की तालाश में..
..कहीं मैं भी बिक ना जाउँ..
..इस बकवास में..!


..मेरे सीनें में तु कुछ ऐसे सा हैं..

..मेरे सीनें में तु कुछ ऐसे सा हैं..
..जैसें ज़मानें में कुछ पैसें सा हैं..!


..कुछ हैंरान सा हूँ..!



..तुम साथ हो मेरे..
..तो मैं कुछ हैंरान सा हूँ..
..तुमेह साथ अपने देख..
..मैं कुछ परेशान सा हूँ..
..मेरें गीत..
..तुम्हारें भी होंठों पे हैं बसनें लगे..
..इसे सुन मैं कुछ परेशान सा हूँ..
..मैं कुछ नादान सा हूँ..
..जो समझ सारी तेरी बातों को..
..मैं परेशां सा हूँ..
..मैं सारी तेरी बातों से अंजान सा हूँ..
..मैं आशिक हूँ तेरा..
..शायद इसी बातों से..
..मैं कुछ परेशां सा हूँ..
..कुछ हैंरान सा हूँ..!

..ये कैसी हैं मुहब्ब्त..


..सिर्फ तस्वीरों को सीनें से लिए जीएँ जा रहें हैं..
..ये कैसी हैं मुहब्ब्त..
..जो किए तो फिर भी मरें जा रहें हैं..!

..इक राज़ होकर..


..कुछ वक्त सा हो गया हूँ..
..वक्त के साथ होकर..
..बात-बात में बदल जाता हूँ..
..इक राज़ होकर..
..कहानी हैं मेरी अब-भी कुछ अधूरी सी..
..के बात-बात में मैं कुछ..
..इरशाद सा हो जाता हूँ..!

..मुहब्बत में क्या है पैगाम..


..मुहब्बत में क्या है पैगाम..
..कुछ लाये हो तो बताओ..
..दिल है उनका क्यूं रुठा मुझसे..
..कुछ समझ पाये हो तो बताओ..
..दर्द में यूं कब तक समेटोगे मुझे मेरी जाँ..
..कोई तारीख लिखवा के लाये हो तो बताओ..
..हैंरानियों में कब तक डालोगे मुझे..
..ये परेशानियों भरा चेहरा कब तक दिखाओगे मुझे..
..ज़िन्दगी को कब-तक बर्बाद बनाओगे..
..किसी के विरह में कब तक मुझसे दुश्मनी निभाओगे..
..कोई उम्र बनवा के लाये हो तो बताओ..
..या मुहब्बत में मेरी..
..मौत लिखवा के लाये हो तो बताओ..
..कब-तक उसके याद को सीनें से लगाओगे..
..रात तो रात अब दिन को भी मेरे कालिख पुतवाओगे..
..सनम हार गया मैं तेरे आगे..
..क्या ये फिर से सुनने आये हो..
..मुहब्बत की आड में फिर वहीं दुश्मनी निभाने आये हो..
..दिल को मेरे आज़ फिर रोता हुआ देखने आये हो..
..ज़िन्दगी को मेरे फिर बर्बाद करने आये हो..
..या आँखों को मेरे फिर से रोता हुआ देखने आये हो..
..बेपरवाह, बेमतलब, बेकार हूँ मैं ये बताने आये हो..
..या कितने हो खुदगर्ज़ तुम ये जताने आये हो..
..मुहब्बत में फिर दुश्मनी निभाने आये हो..
..दिल को फिर से दुखाने आये हो..
..मुहब्बत में क्या है पैगाम..
..कुछ लाये हो तो बताओ..
..दिल है उनका क्यूं रुठा मुझसे..
..कुछ समझ पाये हो तो बताओ..!

..तस्वीर को मेरे..


..अब भी वो मुझसे..
..कुछ रुठें से रहते हैं..
..तस्वीर को मेरे..
..मोड के सीने से रक्खें रहते हैं..!