Tuesday, 25 March 2014
Monday, 24 March 2014
..रास्तें से फ़िर मंज़िल की ओर चल दिए..
..रास्तें से फ़िर मंज़िल की ओर चल दिए..
..कंबल उठाएँ और फ़िर ठंडे रास्ते की ओर चल दिए..
..थकना मना था ये सुना था मैंनें..
..ज़िक्र उठाई तेरी और फ़िर सबेरा की ओर चल दिए..
..सब रास्तें से होकर गुजरना था मुझे..
..ये कविता में उठाई और मुश्किलों की ओर चल दिए..
..सब ये लाज़मी था मुझे ये तेरा बताना..
..एक गज़ल उठाई और फ़िर तेर दिल के ओर चल दिए..
..मुहब्बत के एक साथी थे सिर्फ़ मेरे तुम..
..ये एक लफ़्ज़ में उठाई..
..और फ़िर कहानी की ओर चल दिए..
..रास्तें से फ़िर मंज़िल की ओर चल दिए..
..कंबल उठाएँ और फ़िर ठंडे रास्ते की ओर चल दिए..!
..कंबल उठाएँ और फ़िर ठंडे रास्ते की ओर चल दिए..
..थकना मना था ये सुना था मैंनें..
..ज़िक्र उठाई तेरी और फ़िर सबेरा की ओर चल दिए..
..सब रास्तें से होकर गुजरना था मुझे..
..ये कविता में उठाई और मुश्किलों की ओर चल दिए..
..सब ये लाज़मी था मुझे ये तेरा बताना..
..एक गज़ल उठाई और फ़िर तेर दिल के ओर चल दिए..
..मुहब्बत के एक साथी थे सिर्फ़ मेरे तुम..
..ये एक लफ़्ज़ में उठाई..
..और फ़िर कहानी की ओर चल दिए..
..रास्तें से फ़िर मंज़िल की ओर चल दिए..
..कंबल उठाएँ और फ़िर ठंडे रास्ते की ओर चल दिए..!
Saturday, 22 March 2014
..नाम अपना जो शगुफ़्ता कर रख्खा है तुमने..
..क्या समझोगे मेरे दर्द को तुम..
..नाम अपना जो शगुफ़्ता कर रख्खा है तुमने..!
..नाम अपना जो शगुफ़्ता कर रख्खा है तुमने..!
..वक्त था..
..वक्त था जो दर्द का मेरा गुजर गया..
..वक्त था जो सर्द का मेरा गुजर गया..
..लम्हा-लम्हा जो बिताया था..
..साथ मैंनें तुम्हारें..
..वक्त था जो फ़रेब का मेरा गुजर गया..
..गम में खुद को भिंगोयें खडा था मैं..
..रास्तें पे अकेले तन्हा पडा था मैं..
..सितम जो मुहब्बत में थे मेरे..
..होंठों पे आके ठहरें थे मेरे..
..सब मेरे हिस्सें से थे जुडे..
..जो कुछ थे बचे वो मेरे खिस्सें से थे जुडे..
..वक्त था जो दर्द का मेरा गुजर गया..
..वक्त था जो सर्द का मेरा गुजर गया..
..तुम लफ़्ज़ सँभालते रह गए..
..वक्त था जो मेरे दर्द सँभालते रह गए..
..एक कारवां गुजर गया..
..और तुम दिल सँभालते रह गए..
..हद कर दी तुमने मुहब्बत में..
..कोई मरता रहा..
..और तुम ज़िन्दगी सँभालते रह गए..
..वक्त था जो दर्द का मेरा गुजर गया..
..वक्त था जो सर्द का मेरा गुजर गया..!
..वक्त था जो सर्द का मेरा गुजर गया..
..लम्हा-लम्हा जो बिताया था..
..साथ मैंनें तुम्हारें..
..वक्त था जो फ़रेब का मेरा गुजर गया..
..गम में खुद को भिंगोयें खडा था मैं..
..रास्तें पे अकेले तन्हा पडा था मैं..
..सितम जो मुहब्बत में थे मेरे..
..होंठों पे आके ठहरें थे मेरे..
..सब मेरे हिस्सें से थे जुडे..
..जो कुछ थे बचे वो मेरे खिस्सें से थे जुडे..
..वक्त था जो दर्द का मेरा गुजर गया..
..वक्त था जो सर्द का मेरा गुजर गया..
..तुम लफ़्ज़ सँभालते रह गए..
..वक्त था जो मेरे दर्द सँभालते रह गए..
..एक कारवां गुजर गया..
..और तुम दिल सँभालते रह गए..
..हद कर दी तुमने मुहब्बत में..
..कोई मरता रहा..
..और तुम ज़िन्दगी सँभालते रह गए..
..वक्त था जो दर्द का मेरा गुजर गया..
..वक्त था जो सर्द का मेरा गुजर गया..!
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