Saturday, 22 March 2014

..हाल येँ..

..सयानेँ रिश्तेँ सयानेँ तर्क..
..मासूम बंदा कमजोर नब्ज..
..हाल येँ..
..गाल एक तमाचेँ हजार..!

..सिक्कें सुहानें..

..उल्झ तेरे यादों में जो कमाएँ हैं मैनें सिक्कें सुहानें..
..पकड से दूर हैं मेरे जो सजाएँ हैं मैनें सिक्कें सुहाने..
..अब हक नहीं शायद मेरा मेरे इख्तियार पर..
..सपनें बेच जो कमाएँ हैं मैनें सिक्कें सुहानें..!


..एक साज़िश..

..एक साज़िश तुम्हें बचाने की..
..एक साज़िश तुम्हें गले लगाने की..
..एक साज़िश तेरे में गिरफ़्त हो जाने की..
..एक साज़िश अपने गम सुनाने की..!


Tuesday, 11 March 2014

..इक खुशनुमां..

..इक खुशनुमां दर्द से गुजर रहा हूँ..
..अभी ज़ो मैं मुहब्बत से गुजर रहा हूँ..!

..फिर से वही बात कर आया..

..फिर से वही बात कर आया..
..रात को फिर ख़ाख कर आया..
..हुनर को स्याहीं से लिख आया..
..प्यार को मैं अपने..
..सरे-आम बेच आया..!

..इश्क में फिर एक नाम आया..

..एक और ये नाम आया..
..इश्क में मुझे फिर एक नया काम आया..
..दूर से फिर वही चाँदनी नज़र आई..
..रात में फिर वही नाराज़गी नज़र आई..
..मुहब्बत में एक चेहरा नज़र आया..
..बातों में मेरे फिर एक गज़ल नज़र आया..
..इश्क में फिर एक बदनाम चेहरा जुडता नज़र आया..
..ख्वाबों के परिन्दें फिर आसमां पे नज़र आया..
..बातों में मेरी एक दर्द नज़र आया..
..रातों में फिर गमों भरा चेहरा नज़र आया..
..आशिकों के बातों से दूर..
..राह चलते एक गरीब नज़र आया..
..ज़मानें की भीड में एक बच्चा भूखे नज़र आया..
..आँखें बंद कर चलते राहगीर नज़र आया..
..उम्मीद भरा एक चेहरा उदासी से नज़र आया..
..इश्क में फिर एक नाम आया..
..रूह से मेरे जुडते मेरा खुदा नज़र आया..!

..तो फिर ये आशिकी किस बात..!

..मेरे हालातों पे गर तू ना हँसे..
..तो फिर ये दर्द किस बात..
..मेरे गज़ल में गर तू ना दिखे..
..तो फिर ये मुहब्बत किस बात..
..ज़मानें के दर्द में तू दिखता हैं मुझे..
..गर हर-पल तुझमें खोया ना रहूँ..
..तो फिर ये आशिकी किस बात..!