Thursday, 28 November 2013

..आँखों पे रात आके कुछ ठहर सी जाती हैं..


..अक्सर हर बात कुछ पूरी सी हो जाती हैं..
..ज़िक्र तेरा लबों पे आते-आते कुछ रात सी हो जाती हैं..
..ज़िक्र हैं क्या तेरा..
..मेरे जी का हैं धडकना..
..आँखों पे रात आके कुछ ठहर सी जाती हैं..!

..हो कोइ बारिश यहां..


..दर्द ए दिल की बात कोइ बता दे इसे यहां..
..हैं जो दिल की बात कोइ ज़रा सुनवा दे इसे यहां..
..हो कोइ बारिश यहां..
..जो मुझे खुद में भींगा दे पूरी तरह..
..हो कोइ शक्स यहां जो मेरा हो पूरी तरह..
..रातों में मैं क्यूं खुद जागूं अभी..
..सपनों में ही खोया रहूं क्यूं हरपल मैं अभी..
..परेशां हैं क्यूं खुद ये बातें मेरी..
..बता दे तु कभी इसे तु होगी कभी मेरी..
..सुनवा दे होंठों पे इसे बसे नामें मेरी..

..हैं ये तेरे इश्क में डूबा किनारा करा दे इसे..
...दर्द ए दिल की बात होंठों से सुना दे इसे..
..बाहों में बाहें डाल सीने से लग जा मेरे..
..दर्द ए दिल की बात कोइ बता दे इसे यहां..
..हैं जो दिल की बात कोइ ज़रा सुनवा दे इसे यहां..
..हो कोइ बारिश यहां..
..जो मुझे खुद में भींगा दे पूरी तरह..!

Friday, 22 November 2013

..तस्वीरें बदलती ज़िन्दगी की..

..बदलती ज़िन्दगी बदलते वक्त के साथ..
..ख्वाबों का बदलना परिस्थितियों का बदलना..
..तेरा मेरे खातिर बदलना..
..सारी बदलाव इक बदलते वक्त के साथ..
..और बदलते वक्त मेरे साथ..
..मेरे खुशियों में होना मेरे दर्द में रोना..
..वो कहते हैं ना वक्त का मरहम होना..
..सावन का सरगम होना..
..टूटते तारों का मंगत होना..
..सारी अदाएँ सारी खताएँ सारी ज़िन्दगी मेरी ज़िन्दगानी होना..
..मुझसे जुडना मेरा होना मेरा होके जीना..
..इससे ज़्यादा और क्या बदलते वक्त में तेरा मेरे साथ होना..
..होंठों पे तेरे मेरे नाम का होना..
..आँखों में तेरी मेरे होने का ख्वाब संजोना..
..रातों में गुमनाम मेरे नाम का होना..
..ज़िन्दगी का होना..
..सारी फरेबी ज़ालों का एकदम से कुछ सच सा होना..
..बदलती ज़िन्दगी में तेरा मेरा होना..!

Monday, 28 October 2013

..इक ख्वाब अँधेरी-धुँधली सी..

..इक ख्वाब अँधेरी-धुँधली सी..
..लेकिन खुद से बेपरवाह बेखौफ मुझसे जुडी..
..लेकिन हाँ कुछ दूर हैं खडी..
..थोडा सा मै और थोडी रात हैं उसका हिस्सा..
..बदलती ज़िन्दगी की तस्वीरों में..
..थोडा वजूद हैं मेरा उसका किस्सा..


..तस्वीरों में ढल गए गुज़र गए बीत गए..
..वो सारें-बात..
..ज़िन्दगी की राह में..
..अब अकेला-तन्हा खडा-पडा हैं उसका खिस्सा..
..टूट गए सारें ख्वाब बिखर गए अरमां सारे..
..अन्धेरा के बाद यूँ जो अचानक सा हुआ सबेरा..
..इक सायां था..
..मेरा मुझसे कुछ जुडा सा..
..वो भी रात बाद अलग सा हो गया..
..जैसे कल सबेरा मैं था खडा अकेला..!

Wednesday, 23 October 2013

..इक बार फिर से..

..इक बार फिर से उठा डाली किसी ने..
..हकीकत को राज़नीति से मिला डाली किसी ने..
..दिल की एहसास को रंगें-सँवरते हाथ को..
..प्रशासन की आग में झोक डाली किसी ने..
..दिल की गहराइयों को..

..खुद में छुपे हुएँ परछाइयों को..
..गली-चौराहों में होती कारवाइयों को..
..अपनी ज़िन्दगानी से फिर ज़ोड डाली किसी ने..
..मुज़रीम के पैर कानून के हाथ..
..बदतमीज की ज़ुबान और सामाज़ की उँगली..
..को फिर से बेवज़ह दिखा डाली किसी ने..
..इक बार फिर से इक मशाल ज़ला डाली किसी ने..
..खुद के वज़ूद को..
..धीरे-धीरे सबके दिल में पहुँचा डाली किसी ने..
..इक बार फिर हक की बात सिखा डाली किसी ने..!

Sunday, 20 October 2013

..इक धुंधली सी रात..

Photo: ..गहरे सन्नाटें काली-कुहरें ठंडी भरी रात..
..यादों में संवरती ये धुंधली सी रात..
..जहाँ कोइ किसी का नहीं..
..यादों के सिवा यहाँ कोइ और किसी का नहीं..
..भींगी हल्की-हल्की बारिशों के बीच..
..चेहरे के उपर गिरते बारिशों की बूंद..
..गर्म ख्वाबों के बीच..
..तेरी घनी ज़ुल्फों के बीच..
..इक एहसास..
..आँखों से बूंदों के रूप में उतरते..
..मेरे सारें ख्वाब..
..काली-घनी कुहासे से भरी इक धुंधली सी रात..
..दिल की बात आँखों में भरे आँसू से कहे-बिन बयां..
..गर्म प्यालों के बीच..
..बनी तेरी खुबसूरत सी इक तस्वीर..
..ठंडी हवाओं के बीच..
..इक पिघलते एहसास का होना..
..घनी-काली रातों के बीच..
..बहती हवावों बारिशों के बीच..
..तेरा मुझमें होना तेरा मुझसे होना..
..सारी दिलकशी बातों का एहसास होना..
..रातों के बीच ख्वाबों से परे..
..तेरा मेरे एहसासों में होना..
..मेरा मेरे रूह से हैं होना..!

..गहरे सन्नाटें काली-कुहरें ठंडी भरी रात..
..यादों में संवरती ये धुंधली सी रात..
..जहाँ कोइ किसी का नहीं..
..यादों के सिवा यहाँ कोइ और किसी का नहीं..
..भींगी हल्की-हल्की बारिशों के बीच..
..चेहरे के उपर गिरते बारिशों की बूंद..
..गर्म ख्वाबों के बीच..
..तेरी घनी ज़ुल्फों के बीच..
..इक एहसास..
..आँखों से बूंदों के रूप में उतरते..
..मेरे सारें ख्वाब..
..काली-घनी कुहासे से भरी इक धुंधली सी रात..
..दिल की बात आँखों में भरे आँसू से कहे-बिन बयां..
..गर्म प्यालों के बीच..
..बनी तेरी खुबसूरत सी इक तस्वीर..
..ठंडी हवाओं के बीच..
..इक पिघलते एहसास का होना..
..घनी-काली रातों के बीच..
..बहती हवावों बारिशों के बीच..
..तेरा मुझमें होना तेरा मुझसे होना..
..सारी दिलकशी बातों का एहसास होना..
..रातों के बीच ख्वाबों से परे..
..तेरा मेरे एहसासों में होना..
..मेरा मेरे रूह से हैं होना..!

Friday, 18 October 2013

..दिल की बात..

..दिल तो कहना बहोत कुछ चाहता हैं..
..खिलाफ तेरे..

..मगर होंठों को मेरी..
..इज़ाज़त नहीं तेरे खिलाफ होने की..
..बातें सारी तेरी..
..संगीन-ज़ुर्म भरी..
..चाहता हैं दिल मिटा दे इसे यादों से मेरी..
..मगर मेरे रूह को इज़ाज़त नहीं..
..तेरे खिलाफ जीने की..
..दिल चाहता हैं हटा दे..
..सारे रश्मों-रिवाज़ों को..
..सामाज़ की बातों को..
..कर दे किनारें अपने सारे अधूरे ख्वाबों को..
..छुडा के दामन फरेब से अपना..
..ज़ीने की इक नयी सी कुछ उम्मीद जगा दे..
..दिल चाहता हैं कुछ ऐसा हो जाए..
..जो बात पन्नों पे सज़ाऊँ..
..तो आँखों से गिरते बूँदे ना छुपाऊँ..
..दिल चाहता हैं कोइ बात भी बनाऊं..
..तो ज़माने के नज़र में आ ज़ाऊँ..
..दिल चाहता हैं लिख्खें ये सारें मेरे अल्फाज़..
..महबूब मेरे तुम होंठों से इक बार फिर दुहराओ..
..दिल चाहता हैं ये सारी दिल की बातें..
..तुम तक कैसे भी पहुँचाऊं..
..दिल कहना चाहता तो और कुछ बहोत हैं..
..मगर ज़ां ये तुमेह मैं कैसे समझाऊं..
..दिल की बात तेरे दिल तक कैसे पहुचाऊँ..!