Monday, 29 September 2014

निसार कर दूं [Nisar Kar Doon]

तुम जो कहो तो मैं इश्क का इज़हार कर दूं
खातिर तुम्हारें मैं जां भी ये निसार कर दूं

तस्वीर से निकल बाहों में चली आई हो तुम
कहो जो तुम तो तेरी ज़ुल्फ़ों में मैं रात कर दूं

इन लबों से लब लगकर भी कुछ कहते हैं जां
हुक्म जो करो तो मैं भी ये आँखें चार कर दूं

लेकर तो ये सब मैं गुजरा ही था अए वर्मा
तुम जो कहो तो वो मुक्कमल किताब रख दूं

नितेश वर्मा

Sunday, 28 September 2014

खंज़र हैं इतनें [Khanjar Hai Itne]

हैं उल्झन ऐसी की यें आवाज़ें भी नम हैं
खंज़र हैं इतनें, मगर कातिल ही कम हैं

सहम गयी हैं ये फ़िजा, ये आँखें, ये रातें
बेवजह थीं जो बारिश गयी आज़ थम हैं

सबनें हिस्सों से हैं इक कहानी बताया
कट गयी ज़ुबां मेरी यें साँसें जो कम हैं

सबर रख-कर इक इम्तिहान भी दे दी
मगर थीं जो बातें उसमें आज़ भी दम हैं

उठा लो इन परिंदों का ये बसा बसेरा तुम
जब ये जमाना ही लूट के खानें में रम हैं

नितेश वर्मा

..मुहब्बत वो मिलता नहीं.. [Muhabbat Wo Milta Nahi]

..अब सुकूं कहीं मिलता नहीं..
..मिल तो जाएं वो..
..मगर मुहब्बत वो मिलता नहीं..

..चाहता था मैं भी बताना ज़मानें को..
..मगर जमानें को भी कहीं..
..अब सुकूं मिलता नहीं..

..कहे तो सब एक साथ थें मेरे..
..मगर बेकफ़न कब तक थी लाश..
..खबर ये मिलता नहीं..

..आ जाऐंगे इस जद में सब..
..मगर काफ़िरों को..
..कभी ठिकाना मिलता नहीं..

..यूं ही गर उठती रही आवाज़ मेरी..
..हो जाऐंगे सबके आँखें नम..
..मगर बारिशों में..
..कभी कोई खबर मिलता नहीं..

..टूट चूकां हैं मुहब्बत..
..कही हर अफसानों से..
..मगर इन परिन्दों को कभी..
..ये खबर मिलता नहीं..

..नितेश वर्मा..

हमारें सब [Humare Sab]

किस कदर रूठे हैं हमसे हमारें सब
इल्जाम सर कर दिया हैं हमारें सब

अब मनानें को मैं किस गली जाऊँ
हमसे ही रूठे बैठे हैं जो हमारें सब

बदलें की नफ़रत कितनी मारती हैं
हैंरा हैं हालत देख के ये हमारें सब

जो सुकूं मिलता किसी के बाहों में
चले आतें किसी बहानें हमारें सब

लो हद हो गयी इस बात की वर्मा
मुहब्बत में क्यूं मरे ये हमारें सब

नितेश वर्मा

कर लिया उसनें [Kar Liya Usne]

हैंरानियत को भी जो पढ लिया उसनें
मुहब्बत ये कैसा अब कर लिया उसनें

ये तिनका ही सहीं जो मेरे नसीब का
इस नसीब का यकीं जो कर लिया उसनें

चल-कर ही इस सफर का थकान मिटा
आँखों से जो मेरें पानी पी लिया उसनें

इंतज़ार की हैं उसनें मेरे आने तक की
मिला जो ना खुद को जला लिया उसनें

रूठा था दिल जो किसी बात पे, देख अब
तस्वीर को मेरे सीनें से लगा लिया उसनें

उसनें शायद ठीक ही कहा था कभी वर्मा
हिसाबों का जो किताब कर लिया उसनें

नितेश वर्मा

लिक्खें जाऐंगे [Likhhe Jayenge]

इन्तकाम पे जो सब उतर आयेंगे
इंसान अबके हैवान ही कहे जाऐंगे

मन किस कदर रूठा है सबका यहाँ
हिसाब अब सब यहाँ लिक्खें जाऐंगे

जो होना था हो चुकां सब यहाँ मेरा
दुश्मनी ही सहीं अब निभाएं जाऐंगे

कितना कमज़र्फ़ निकला मन मेरा
मुद्दतों तक ये जुबाँ सताएं जाऐंगे

अब ना की हैं उसने कोई फरेबी वादें
फिर भी वो शायद कहीं मुकर जाऐंगे

वो आसमां से सफ़र कितना सुहाना था
ख्वाबों में फिर वो शक्ल बनाएं जाऐंगे

नितेश वर्मा

करता हैं [Karta Hai]

तेरें यादों में जो हुआ था हाल मेरा
सुरूर अब भी ये बताया करता हैं

इंसानों के गम कभी छुपतें ही नहीं
भरी रात ख्वाब ये सताया करता हैं

अब तक जो रहा था माँ के आँचल में
अब वो भरे बाज़ार बेटियाँ उठाया करता हैं

एहसान फ़रामोश निकल गए परिन्दे सारें
घनी रात ये आसमां बताया करता हैं

लेकर चला था जो इक उम्मीद मुझसे
कैसे कहूँ अब भी वो याद आया करता हैं

लग चुकी हैं हायं इस ज़माने को वर्मा
फ़ितरत ये तेरा अब दिखाया करता हैं

नितेश वर्मा