Thursday, 24 September 2015

सुन मेरी धड़कनों को तू कभी

सुन मेरी धड़कनों को तू कभी
ढूंढ के पता शहर आजा कभी
मचलता हैं यूंही बावरा ये दिल
बात कर ना सता बेवजह कभी
सुन मेरी धड़कनों को तू कभी।

तुझको चाहता नहीं है दिल मेरा
फिर ढूंढता है क्यूं वजह बेवजह
तू सर्द रातों वाली वो चाँदनी है
मैं तकता यूं लेके वजह बेवजह
आजा ना सता मुझको तू कभी
सुन मेरी धड़कनों को तू कभी।

मेरी प्यास की समुन्दर हो तुम
नहीं ढूंढता हूँ मैं बारिश बेवजह
जिक्र आकर ठहर जा रहा क्यूं
ड़रता है वो लेके वजह बेवजह
सुनकर कुछ ना सहम तू कभी
सुन मेरी धड़कनों को तू कभी।

नितेश वर्मा

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